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राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी के "ग्राम स्वराज्य" की परिकल्पना के प्रति कटिबद्ध एवं प्रतिबद्ध राष्ट्र, स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् से ही पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से चरणबद्ध रूप में कल्याणकारी योजनाओं का सृजन करता हुआ उन्हे मूर्त रूप देने का भरसक प्रयास कर रहा है। गॉवों में बसने वाले भारत के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना तब तक साकार नहीं हो सकती जब तक कि गॉव एवं ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी जाती। इस तथ्य को मद्देनजर रखते हुये राज्य सरकार ने केन्द्र के समन्वय से पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से इस क्षैत्र पर विषेष ध्यान दिया है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के इन 60 वर्षों में राज्य ने विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुये विकास के अनेक सोपान चढते हुये कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। एक ओर जहां राज्य सरकार विकास की गति को तीव्र से तीव्रतम करने के लिये प्रयत्नषील है वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक विपदाएं विकास में बाधक नहीं हो सके इस बाबत भी सजग एवं सचेत रही है। राज्य का अधिंकाष भू-भाग रेगिस्तानी होने के कारण सूखे एवं अकाल की विभीषिका से जूझता रहा है। इसके साथ ही संसाधनों की कमी एवं बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या भी सदैव बनी रही है। फलतः निर्धनता , बेरोजगारी और विषमता आदि समस्याओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सदैव आघात पहुंचता है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार ने गॉवों को न केवल विकास की मुख्य धारा से प्रत्यक्ष रूप से जोडा है, बल्कि ग्रामीण विकास हेतु विपुल संसाधन उपलब्ध कराकर ग्रामीण अंचलों में जनसुविधाओं का विस्तार , रोजगार के अधिक अवसर एवं गरीब परिवारों के आर्थिक स्तर में सुधार लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है जिसके माध्यम से ब्लॉक एवं गावों के ऐ पी एल एवं बी पी एएल कार्ड धारको को केंद्र सरकार के द्वारा संचालित योजनाओ का लाभ दिलाया जायेगा।
ग्रामीण खेती फाउंडेशन की स्थापना एक वृहद उदूदेश्य की पूर्ति हेतु कम्पनी में कार्यरत कर्मचारियों व सामान्य सदस्यों का पूर्ण लाभ उनकी सुरक्षा व रोजगार के साधन उन्ही के क्षेत्रों में उपलब्ध कराने की है, इन्ही उदूदेश्यों की पूर्ति हेतु सदस्यों का समूह बनाते हुये डेयरी की स्थापना, कोल्ड स्टोरेज की स्थापना व कस्बों स्तर पर रिटेल मार्ट को चरणबद्ध तरीके से प्रारम्भ किया जाना है, जिसमें उस क्षेत्र के अपने समस्त सदस्यों का सीधा लाभ हो सके, साथ ही अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को देखते हुये अपने सदस्यों के हित स्वरूप आपकी प्रत्येक डेयरी पर शिक्षा एवं चिकित्सा सम्बन्धी जरूरतों के दृष्टिगत एक प्राथमिक स्कूल व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का भी प्रवधान किया गया है । आपकी प्रत्येक डेयरी में एक बड़ा गोबर गेस प्लांट भी प्रस्तावित है, जिससे हमारे सदस्यों को गोबर गैस रसोई एवं बिजली हेतु दी जा सके। ग्रामीण खेती फाउंडेशन का प्रयास आय के साथ रोजगार सूजन का एक बड़ा लक्ष्य है, आज भी हमारे ग्रामीण क्षेत्र का युवा उचित रोजगार न होने से दिगभ्रमित है, हमारे एक संस्थापन से लगभग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से ५०० लोगों के रोजगार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इसके साथ ही एक बडी डेयरी होने से हमारे पास पर्याप्त मात्रा में गोबर की भी उपलब्धता होगी, जिसे हमारे सदस्यों को जैविक खाद के रूप में दिया जायेगा जिससे हमारी कृषि भूमि की उर्वरकता को बढाया जा सके। साथ ही आने वाले दिनों में सदस्यों के हितों हेतु अनेक कार्य किये जायेंगे जो मुख्यत: कृषि से सम्बन्धित होगा, चाहे वह कृषि का ज्ञान हो अथवा उत्पादन बढाने के उपाय।
ग्रामीण खेती फाउंडेशन का मूल उद्देश्य समाज से जुड़े हर वर्ग में विकास हेतु दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करना है।